पांच दिन
लगातार प्रवास और विरोध के बाद आखिरकार फिर लगा “महाराजा मल्हिया पासी द्वार”। विधायक जयदेवी कौशल, पूर्व मंत्री Kaushal Kishore और पासी समाज ने इसे सत्य और सम्मान की जीत बताया।
पासी समाज किसी समाज के इतिहास का विरोध नहीं करता सभी वीर योद्धा को मानता है सम्मान करता है! अवध पासी बहुल क्षेत्र है और हमारी इतिहास भी अवध की ही हैं, झठभर और नर्कवंशी के तरह दूसरे क्षेत्रों पे दावा नहीं करते, देखो झाटभरो को रहता है पूर्वांचल में और दावा करता है अवध के राजाओं पे, अवध में आज भी झठभर नाम का कोई जाति पाई नहीं जाती है, बियार, बिंद,रजहर, कहार मिलकर एक टाइटल भरपासी से मिलता जुलता बनाया और बाद में भरपासी पे ही दावेदारी ठोक दिया!🤣
जब पासी समाज में पहले से ही राजवंशी, त्रिशूलीय, कमानी व्याधा गुज्जर रावत कैथवास खटीक अरख भरपासी राजपासी, इतिहास 20 से ऊपर उपजाति का गजेटियर में भी उल्लेख है! वह गजेटियर तो पासी समाज के लोगो ने तो नहीं लिखा वह गजेटियर अंग्रेजों के द्वारा सर्वे में लिखा गया है! हमारे इतने ज्यादा उपजाति होने के पीछे भी मुस्लिम आक्रांता है! पासी समाज के सभी उपजाति के नाम अस्त्र शस्त्र के नाम पे है जो जिस क्षेत्र में निपुण था उसे वह उपाधि दे दी गई, अंग्रेजों ने पासी मारो अभियान चलाया था क्रिमिनल एक्ट लगाकर, उसी में पासी समाज अपने जान बचाने और अस्तित्व को कायम रखने के लिए उपजाति के नाम का उपयोग करने लगा, अंग्रेजों को पासी से इतना डर क्यों लगता था तो उसका कारण था पासी निर्भीक होकर अंग्रेजों की हत्या कर देता था!
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