2018 की बात है..मुजफ्फरपुर के एक होटल में दोस्त का रिसेप्शन था..
बहुत अच्छा दोस्त था और निहायत ही शरीफ लड़का इसलिए ज्यादा खुश थी उसके लिए..
मैं थोड़ा जल्दी चली गई थी..कमरे में दुल्हन और कुछ लड़कियां थी जो दुल्हन की बहनें थी..
जाहिर सी बात है धर्म अलग थे हमारे तो कल्चरल डिफरेंस था इसलिए मैं बहुत उत्साहित होकर खूब बातें कर रही थी उनसे..
उनके रीति रिवाजों को देख समझ रही थी..
दुल्हन का साइड वाला टीका कितना प्यारा लग रहा था..
थोड़ी देर में बात हुई के अब स्टेज पे जाना है..
अरे यह क्या..
अलग ही झटका लगा मुझे..
सिर्फ लड़का ही जाएगा स्टेज पे..
दुल्हन तो रूम में ही रहेगी..
इक्वलिटी इक्विटी के लिए हमेशा लड़ने वाली मैं मेरे लिए यह दिल टूटने वाला मोमेंट था..
मैं एक्सेप्ट ही नहीं कर पा रही थी के दुल्हन रूम में ही रह जाएगी..
और दुल्हन रूम में रही तो दूल्हा भी रूम में रहता,वो क्या करेगा अकेले स्टेज पे बैठ कर..
खैर बहुत सारे सवालों और असंतुष्टि के साथ मैं घर आ गई..
कुछ दिन बाद दोस्तों के साथ मूवी का प्लान बना..
हम पांच दोस्त..जिसमें दो लड़की और तीन लड़के..और उस नए निकाह वाले दोस्त की वाइफ..
मैं usual जींस में,एक दोस्त सलवार कुर्ती में तीनों लड़के शर्ट जींस में और उसकी वाइफ..वो पूरी ब्लैक ऊपर से नीचे ढकी हुई..
जो दोस्त मेरा इतना कूल था..पढ़ने लिखने में बढ़िया, जहीन..
जब हम क्लास में सावित्री बाई फूले और महिलाओं की शिक्षा और आजादी पर बात करते तो उसकी तार्किक क्षमता उसकी सोंच की मैं कायल होती..वही दोस्त आज खुद शर्ट पैंट में अंग्रेज बना हुआ और बीवी..!
उसकी वाइफ ने सिनेमा हॉल में भी अपना पर्दा नहीं हटाया था..
जबकि मुजफ्फरपुर की बात है ये..वो शहर में सिर्फ अपनी वाइफ के साथ रहता था..ऐसा नहीं था के गाँव में हो या घर वालों के दवाब में उसकी वाइफ ने इतना पर्दा किया हो..
सिनेमा हॉल से निकलते ही मेरे अंदर कुछ दरक चुका था..
फिर हम दोस्त कभी नहीं मिले..
मेरे मन में जो इमेज था उसका वो धराशाई हो चुका था..
फोटो उसी फंक्शन की है..
ऐसा नहीं कि मैं किसी और धर्म से नफरत करती हूँ..
अपने धर्म वाली महिलाओं को भी चेहरा छुपाए देखती हूँ तो मैं उस माहौल से धीरे से खिसक लेती हूँ..
लेकिन यह तो है कि पढ़ी लिखी शहरों में रहने वाली महिलाएं मुंह छुपाए नहीं घूमती..
उन्हें पता है उनका चेहरा ही उनकी पहचान है..
और न ही लड़के अपनी पत्नी को ऐसे घूंघट करवाते हैं..
इसलिए हे देवियों!तुमसे विनती है अपनी आजादी पे गर्व करो..
पंख फैला के आसमान में उड़ान भरो..
आधी धरती आधा आसमान तुम्हारा है..
सपने देखो उन्हें पूरा करो..
ना कि किसी ऐसे लड़के के मोहब्बत में पड़ जाओ कि खुद की पहचान छुपाने पर गुरूर करने लगो..
टीसीएस company वाला न्यूज पढ़ते हुए ये याद आया...

Post a Comment