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हिन्दू लड़कियों को लव जिहाद में फसाकर, निकाह करने के बाद, वैश्यखाने (रंडीखाने) में बेच दिया जाता है! 2 से 3 बच्चे पैदा कर के तलाक देकर सामूहिक बलात्कार किया जाता है फिर ब्लैकमेल और रंडीखाने में बेच दिया जाता है, हिन्दू लड़कियों सावधान रहो!

 

लवजिहाद : प्यार का इस्लामी कत्ल

पहले जिहाद आया। आतंकवादियों का जिहाद, जिसमें मजहब के नाम पर निर्दोष लोगों की जान ली गई। उसके बाद कट्टरवादी मजहबी तत्वों ने हिन्दू आबादी में सक्रिय होकर ‘लव जिहाद’ शुरू किया। ‘लव जिहाद’ यानी जिसमें मुसलमान लड़का अपना मजहब नहीं बदलता बल्कि ‘निकाह’ के लिए हिन्दू लड़की का कन्वर्जन किया जाता है। इस तरह की घटनाएं कई साल से पूरे देश में सुनने में आती रही हैं। 2008 में केरल में 'लव जिहाद' की गंभीरता से परदा हटा था। इसके बाद काफी हंगामा हुआ मगर वहां की सरकार ने वोट बैंक की राजनीति को ध्यान में रखकर इस मामले को नजरअंदाज कर दिया। 2014 में उतर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के मुद्दे ने तूल पकड़ा मगर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बजाय इस पर कार्रवाई करने के अप्रत्यक्ष रूप से इसका समर्थन किया।



  उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में लव जिहाद की घटनाओं में तेजी आई थी। इधर हाल की बात करें तो गत 5-6 माह में अलग-अलग स्थानों पर ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया गया। देखने वाली बात है कि सभी अपराधी न सिर्फ एक मजहब से हैं बल्कि हिन्दू लड़कियों को झांसे में लेने का तरीका तकरीबन एक जैसा है। यहां गत कुछ माह की घटनाओं और उन पर पुलिस की कार्रवाई पर नजर डालना समीचीन होगा।
2014 में प्रदेश में हुई लव जिहाद की घटनाओं से पूरा प्रदेश हिल गया मगर उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण में ही लगी रही थी। मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने जैसे ही लव जिहाद के मामले को संसद में उठाने की बात कही, तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, ‘अब क्या प्यार करने वालों को रोक दिया जाय? हेमा मालिनी की फिल्म धर्मात्मा को देखने से प्यार बढ़ेगा या घटेगा!’ अखिलेश यादव के इस बेतुके बयान पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने उस समय कहा था, ‘अखिलेश फिल्म देखने के बजाय, खराब होती कानून—व्यवस्था की तरफ ध्यान दें।’

उत्तर प्रदेश में कानपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली एवं बागपत आदि जिले विगत दो दशक से ‘लव जिहाद’ में लगे कट्टर मजहबी तत्वों के निशाने पर हैं। पिछले कुछ माह में इन जनपदों में ‘लव-जिहाद’ के प्रकरण तेजी से सामने आये। कानपुर के चकेरी थाना अंतर्गत गत 2 सितंबर को लव जिहाद का ताजा मामला सामने आया। 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को पड़ोस के मुस्लिम युवक ने लव जिहाद के जाल में फंसाकर जबरदस्ती कन्वर्जन कराया और निकाह कर लिया। वह कुछ दिनों बाद घर लौटी तो उसने बताया कि उसके साथ जबरदस्ती निकाह किया गया था। वहां पर उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। बताया जाता है कि स्थानीय हिन्दू संगठनों की मदद से लड़की को मुक्त कराया गया है। इस मामले में आगे कार्रवाई जारी है। मेरठ और लखीमपुर खीरी जनपद में ‘लव जिहाद’ का परिणाम अत्यंत क्रूरतम रहा। प्रेम-जाल में फंसाने के बाद हिन्दू लड़कियों की बेरहमी से हत्या तक कर दी गई। गत 25 अगस्त को लखीमपुर खीरी जनपद में एक दलित लड़की की बलात्कार के बाद हत्या की गई। इस घटना की खोजबीन चौबीस घंटे के भीतर पूरी की गई। दिलशाद नाम के मुस्लिम युवक ने उस दलित लड़की की बलात्कार के बाद हत्या की थी। पेश से दर्ज़ी दिल़शाद ने कपड़ा सिलने के बहाने उससे दोस्ती की। फिर वह उसे लव जिहाद का शिकार बनाना चाहता था। लड़की निकाह को तैयार नहीं हुई तो दिलशाद ने बेरहमी से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी। दिलशाद पर एनएसए के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।

इमरान बना आकाश
प्रयागराज जनपद के नैनी थाना अंतर्गत रहने वाली एक महिला भी लव जिहाद का शिकार हुई। पीड़िता ने बताया, ‘सोशल मीडिया पर आकाश नाम के लड़के से जान-पहचान हुई थी। बातचीत होने के बाद धीरे-धीरे दोस्ती हो गई। लड़के ने अपना नाम आकाश बताया था और शादी का वादा किया था। इस दौरान मैं दो बार गर्भवती भी हो गई। जब मैंने शादी के लिए दबाव बनाया तब उस लड़के ने असलियत बताई। उसने बताया कि वह इस्लाम मजहब का है और उसका नाम इमरान है। अगर शादी करनी है तो मुझे इस्लाम को अपनाना पड़ेगा तभी निकाह हो पायेगा। उसकी सचाई उजागर होने के बाद मैंने थाना नैनी में इमरान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।’

कतील की करतूत
अम्बेडकर नगर जनपद से एक लड़की नौकरी की तलाश में लखनऊ आई। उसे किसी ने बताया कि लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाला मोहम्मद कतील मीडिया के क्षेत्र से जुड़ा है। वहां पर उसे नौकरी मिल सकती है। पीड़िता ने बताया, ‘पहली बार मुलाकात हुई तब कतील ने कहा कि संपर्क में बने रहिएगा। अच्छी नौकरी दिलवा दूंगा। इसके बाद फोन पर बातचीत होने लगी। एक दिन कतील ने घर बुलाया और काफी में कुछ नशीला पदार्थ पिला दिया। बेहोश होने के बाद बलात्कार किया। जब मैंने पुलिस में शिकायत करने की बात कही तब कतील ने हाथ जोड़कर माफी मांगी और शादी का वादा किया। कुछ दिन पहले मुझे इसकी असलियत का पता चला। कतील पहले से शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है।’ पीड़िता ने 29 अगस्त 2020 को लखनऊ के गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। उसके बाद पुलिस ने कतील को गिरफ्तार कर लिया।

फैजल का जाल
कानपुर के बर्रा इलाके की रहने वाली शालिनी यादव 29 जून 2020 को पेपर देने के बहाने घर से निकली थी। उसके बाद जब वह घर नहीं लौटी तो परेशान घर वालों ने आस-पास खोजबीन की। अंतत: 8 अगस्त को गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज कराई। उसके बाद शालिनी ने अपने फेसबुक पेज पर वीडियो डालकर बताया कि उसने लाल कालोनी के रहने वाले मोहम्मद फैजल से निकाह कर लिया है। कन्वर्ट होकर अपना नाम फिजा फातिमा रख लिया है। लड़की के घर वालों की तहरीर पर आरोपी युवक फैजल के खिलाफ धारा 364, 360, 120-इ और 511 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई।

शालिनी यादव के भाई विकास यादव ने बताया, ‘कानपुर में ‘लव जिहादी’ गैंग सक्रिय है। मेरी बहन घर से दस लाख रुपये लेकर गई है। रुपये के लालच में फैजल उसे डरा—धमकाकर बयान दिलवा रहा है। मेरी बहन के अलावा चार और लड़कियां लव जिहाद का शिकार हो चुकी हैं।’ शालिनी की मां ने कहा, ‘मेरी लड़की कभी ऐसा नहीं कर सकती। जो मुसलमान लड़का उसे भगा कर ले गया है वही दबाव में लेकर गलत बयान दिलवा रहा है। मैंने अपनी लड़की को पढ़ाया-लिखाया, मेरी अपनी ही लड़की मेरे खिलाफ बयान कैसे दे सकती है!’ विगत दो माह में कानपुर नगर की सिर्फ जूही लाल कालोनी से तीन हिन्दू लड़कियां मुस्लिम लड़कों के द्वारा अगवा की गई हैं। जूही लाल कालोनी के ही रहने वाले शाहरूख नाम के दो युवकों ने कल्याणपुर की आवास विकास कालोनी में रहने वाली दो सगी बहनों को अपने प्रेम जाल में फंसाया और कन्वर्जन करा कर निकाह कर लिया।
कानपुर जनपद में लड़कियों के परिजन कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल से मिले और कार्रवाई की मांग की। पुलिस महानिरीक्षक ने इस मामले की जांच के लिए एक एसआइटी का गठन किया। यह भी आदेश दिया कि अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाय। मोहित अग्रवाल ने बताया, ‘पांच बच्चियों के परिजन मेरे कार्यालय में आए। बच्चियों के परिजनों ने प्रार्थना पत्र दिया कि बच्चियों को ब्रेन वॉश करके ले जाया गया है। कन्वर्जन करने के बाद शादी की गई। परिजनों की मांग है कि इन बच्चियों को बरामद कराया जाय और उनका बयान अदालत में कराया जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस सम्बन्ध में सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं।’
इसके बाद गत 31 अगस्त को कानपुर में लव जिहादी मोहसिन खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसने डाककर्मी की बड़ी बेटी से निकाह किया और छोटी बेटी को अपने दोस्त आमिर से मिलवा दिया। छोटी बेटी को लव जिहाद का शिकार बनने से किसी तरह बचाया गया। मोहसिन खान ने अपना नाम समीर बताया था। डाककर्मी की छोटी बेटी ने बताया, ‘स्कूल जाते समय ये लोग पीछा करते थे। इन्होंने मेरी बहन को प्रेम जाल में फंसाकर निकाह कर लिया।’

मां-बेटी को किया दफन
मेरठ में प्रिया और उसकी 10 साल की बेटी के शव दफन करके उसी घर में रहते आ रहे शमशाद नाम के एक युवक ने अपना हिन्दू नाम बताकर प्रिया को अपने प्रेम जाल में फंसाया था। करीब 5 वर्ष तक शमशाद और प्रिया साथ-साथ रहे। इसी बीच जब महिला को शमशाद की असलियत का पता चला तब वह विरोध करने लगी। तिलमिलाए शमशाद ने मां-बेटी की हत्या करने के बाद शवों को घर के अन्दर ही दफन कर दिया। दोनों शव दफन करने के बाद शमशाद उसी घर में रह रहा था। जब पुलिस ने गहन जांच शुरू की तो शमशाद फरार हो गया। घर की खुदाई करने पर मां-बेटी के शव बरामद हुए।

पुलिस ने बताया कि गाजियाबाद के लोनी की रहने वाली प्रिया शादीशुदा थी और उसकी एक बेटी भी थी। वह अपने पति से अलग रहती थी। इसी बीच मेरठ जनपद के परतापपुर थाना अंतर्गत भूडबराल में रहने वाले शमशाद ने प्रिया से सोशल मीडिया के माध्यम से जान-पहचान बढ़ाई। सोशल मीडिया पर निकटता बढ़ाने के बाद शमशाद ने प्रिया से मुलाकात की। शमशाद को यह मालूम था कि अगर उसने अपना असली नाम बताया तो प्रिया उस पर भरोसा नहीं करेगी। शमशाद ने प्रिया को अपना फर्जी हिन्दू नाम बताकर अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। दोनों करीब 5 वर्ष तक एक साथ रहे। हाल ही में प्रिया को यह पता लग गया था कि जिसके साथ वह रह रही है उसका असली नाम शमशाद है। उसने अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए हिन्दू नाम का सहारा लिया था।
प्रिया की सहेली ने प्रिया और उसकी दस वर्ष की बेटी के गायब होने की सूचना पुलिस को दी थी। इस बीच पुलिस ने शमशाद से पूछताछ की मगर शमशाद ने पुलिस को सही जानकारी नहीं दी। जब शमशाद को लगा कि वह पकड़ा जाएगा तो वह फरार हो गया। शमशाद के फरार होने के बाद पुलिस ने जब उसके घर की खुदाई कराई तब उसके घर के अन्दर से दो कंकाल बरामद हुए। 23 जुलाई 2020 को पुलिस मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद शमशाद को गिरफ्तार किया गया।

मेरठ का शाकिब
मेरठ जनपद का निवासी शाकिब पंजाब के लुधियाना में नौकरी करता था। लुधियाना के मोतीनगर थाना क्षेत्र में रहने वाली बी.कॉम की छात्रा पर उसकी नजर पड़ी। शाकिब ने पहले ही समझ लिया था कि अगर लड़की को यह पता लग गया कि वह मुसलमान है तो वह उससे बात भी नहीं करेगी। शाकिब ने लड़की से मुलाकात का बहाना खोजा और अपना नाम अमन बताया। लड़की ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया। शाकिब के फरेब को वह समझ नहीं पाई और 2019 में करीब 25 लाख रुपये के गहने लेकर घर से भाग गई। शाकिब उस लड़की को भगाकर मेरठ ले आया। मेरठ जनपद के दौराला थाना अंन्तर्गत एक किराए के कमरे में ठहराया। गत वर्ष ईद के मौके पर शाकिब उस लड़की को अपने गांव ले गया। गांव पहुंचने पर उस लड़की को पता लगा कि अमन का असली नाम शाकिब है और वह मुसलमान है। लड़की ने इसका विरोध किया। जब शाकिब ने देखा कि वह नहीं मान रही है तो उसने नशीली दवा पिलाकर बेहोश किया और फिर खेत में ले जाकर गला काटकर उसकी हत्या कर दी।
महीनों तलाश करने के बाद भी कहीं कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। इसके बाद मेरठ पुलिस को पता लगा कि लुधियाना की 23 वर्षीय बी.कॉम की छात्रा अपने घर से गायब है। मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के लोइया गांव के हर उन युवकों के बारे में पता लगाया गया जो बाहर नौकरी करते हैं। एक साल की मेहनत के बाद जब शाकिब के बारे में छानबीन की गई तो 2 जून 2020 को इस हत्याकांड का खुलासा हो सका।

वसीम बना था दिनेश
मेरठ जनपद के एक अस्पताल में वसीम नौकरी करता था। इसने दिनेश कुमार रावत के नाम से फेसबुक पर आईडी बनाई। इसका पहले से ही लव जिहाद में किसी हिन्दू लड़की को फंसाने का इरादा था। किसी को शक ना हो इसके लिए वसीम ने दिनेश कुमार रावत के नाम से नकली आधार कार्ड एवं अन्य पहचान पत्र भी बनावा लिए थे।  वसीम ने फेसबुक के माध्यम से हापुड़ जनपद की रहने वाली लड़की से जान-पहचान बढ़ाई। प्रेम जाल में फंसा लेने के बाद वसीम ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया था। यह वीडियो बनाने के बाद वसीम पीड़िता को ‘ब्लैकमेल’ करने लगा। तब यह सच सामने आया कि दिनेश कुमार रावत असल में वसीम है।

सचाई सामने आने पर वसीम ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी। 8 जून 2020 को पीड़िता के पिता ने वसीम के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उसके पास से दिनेश रावत और वसीम अहमद नाम के पहचान पत्र बरामद किये।पुलिस ने जब वसीम को गिरफ्तार किया तब उसने दबंगई दिखाते हुए खुद को पत्रकार बताया। मुंडाली थाना पुलिस ने वसीम के खिलाफ आईटी एक्ट और आईपीसी 376 सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया।’

फरार हुआ फैजल

मेरठ जनपद के थाना लिसाड़ी गेट के ‘कांच का पुल’ मोहल्ले का निवासी फैजल नई दिल्ली की एक फैक्ट्री में नौकरी करता था। वहीं पर इसकी मुलाकात एक लड़की से हुई जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली है। पहली मुलाकात में फैजल ने असली नाम ना बताकर अपना नाम सोनू बताया। लड़की को प्रेम जाल में फंसा लिया। कुछ माह पहले फैजल ने उससे शादी भी कर ली और एक किराये के मकान में लाकर रखा। जब उसके मुसलमान होने का पता चला तब पीड़िता ने इसका विरोध किया। उसके बाद से फैजल फरार हो गया। पीड़िता गर्भवती है।

उक्त महिला ने विगत जून माह में पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका है। माता-पिता के ना रहने पर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके लिए वह दिल्ली स्थित एक फैक्ट्री में काम करने लगी। वहीं पर उसकी मुलाकात मेरठ जनपद के सोनू उर्फ फैजल से हुई थी।
लव जिहाद के बढ़ते मामलों के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी कहते हैं, ‘हिन्दू लड़की ही कन्वर्ट क्यों कराई जाती है? कन्वर्जन की क्या जरूरत है? ये लव नहीं, लव जिहाद है।’ 2008 में लव जिहाद पहली बार अखबारों की सुर्खियों में आया। हिन्दू, ईसाई और सिख लड़कियां लगातार लव जिहाद का निशाना बन रही थीं। 2009 में  केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल का बयान काफी सनसनीखेज था। उसने कहा था, ‘विगत  कुछ वर्षों में 4,500 ईसाई लड़कियों को लव जिहाद के जरिये निशाना बनाया गया।’ इसी दौरान हिंदू जनजागृति समिति ने खुलासा किया कि ‘30 हजार हिंदू लड़कियां लव जिहाद का शिकार हो चुकी हैं।’  केंद्र में तब संप्रग की सरकार थी। पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई थी। लेकिन केरल सरकार ने राजनीति से प्रेरित होकर कट्टर मजहबियों का बचाव किया। 2009 के नवम्बर माह में  केरल के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक जैकब पुन्नूज ने उच्च न्यायालय को बताया कि ‘पुलिस की जांच में लव जिहाद के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।’ इसके बाद केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.टी. शंकरन ने जैकब की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जबरन कन्वर्जन के कुछ संकेत मिल रहे हैं। इसमें कुछ संस्थाओं का भी हाथ हो सकता है।’

केरल का सबसे चर्चित लव जिहाद का मामला 2015 में सामने आया था। हिन्दू  लड़की होमियोपैथिक डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रही थी। लड़की का नाम अखिला अशोकन था। पढ़ाई के दौरान उसकी दोस्ती दो मुसलमान छात्राओं से हो गई। उन्हीं दोनों के माध्यम से वह इस्लाम के संपर्क में आई। अखिला अशोकन को मजहबी किताबें पढ़ने के लिए दी गईं। ‘ब्रेन वाश’ करने के बाद उसे कन्वर्जन के लिए प्रेरित किया गया। अखिला के घर वालों ने उसे समझाने की कोशिश की मगर वह नहीं मानी और उसने कन्वर्जन करके अपना नाम हदिया रख लिया। इसके बाद हदिया ने शफीन नाम के मुस्लिम युवक से निकाह कर लिया। हदिया के पिता अशोकन ने केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। अशोकन ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के संगठित प्रयास से अखिला को हदिया बनाया गया। हदिया ने विरोध किया मगर केरल उच्च न्यायालय ने हदिया को उसके पिता के संरक्षण में रहने को कहा। केरल उच्च न्यायालय के इस फैसले को शफीन ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय ने हदिया और शफीन को एक साथ रहने की इजाजत दे दी।
लव जिहाद एक कपोल-कल्पना नहीं बल्कि एक कड़वी सचाई बनकर सामने आया है। कुरान और हदीस की कसमें खाते हुए कट्टर मजहबी तत्व ‘काफिरों को सबक सिखाकर जन्नत की हूरें पाना चाहते है’। सोशल मीडिया के जरिए असली पहचान छुपाकर किसी मासूम हिन्दू लड़की को बरगलाना एक आसान रास्ता खोजा है उन्होंने। कालोनियों में स्कूलों या दफ्तरों के आसपास मंडरा कर ‘निशाने’ साधे जाते हैं और फिर एक समूह जुट जाता है उस मासूम को शिकंजे में कसने की साजिश को अंजाम देने में। और वह बेचारी जब तक असलियत समझती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। 

लव जिहाद की फंडिंग

कई घटनाओं से खुलासा हुआ है कि पीएफआई सरीखे कट्टर मजहबी संगठन लव जिहाद को अंजाम देने वालों को पैसा देते हैं। मुस्लिम देशों से इस कार्य के लिए धनराशि भेजी जाती है। केरल के सबसे चर्चित लव जिहाद के मामले पर गौर करें तो शफीन नाम के मुस्लिम युवक ने अखिला अशोकन से निकाह किया था। शफीन ने सर्वोच्च न्यायालय तक मुकदमा लड़ा। सभी जानते हैं कि मुकदमा लड़ना खर्चीला कार्य है।
इसी प्रकार आवारा किस्म के मजहब विशेष के लड़के, जो काफी तड़क-भड़क के साथ  शहरों की गलियों में मंडराते हैं। वे महंगी बाइक से चलते हैं ताकि देखने में लगे कि यह काफी सम्पन्न हैं, जबकि असलियत में ये अधिकतर युवक बेरोजगार होते हैं। लव जिहाद में एफआईआर हो जाने के बाद ये कट्टर तत्व न्यायालय में डट कर मुकदमा लड़ते हैं। इससे स्पष्ट है कि इन लोगों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
अभी हाल ही में एक जासूसी के प्रकरण का अभियुक्त उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किया गया था। उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने हिन्दुस्थान में जासूसी करने का काम दिया था। जांच  के दौरान सामने आया कि आइएसआइ ऐसे कोई काम—धंधा न करने वाले मजहब विशेष के युवकों को हिन्दुस्थान में जासूसी व अन्य समाज विरोधी काम देती है।
लव जिहाद में भी यही आपराधिक कार्य प्रणाली के तहत कार्य किया जा रहा है। यह स्पष्ट हो चुका है कि पीएफआई भारत में अधिक से अधिक इस्लाम का विस्तार करना चाहता है। बड़े पैमाने पर कन्वर्जन कराने की योजना है। उनके हिसाब से लव जिहाद कन्वर्जन का सबसे आसान रास्ता है। कुछ वर्ष पहले केरल एवं दक्षिण के कुछ राज्यों में ‘किस आफ लव’ कैंपेन हुआ था। इस आयोजन के पीछे भी पीएफआई का हाथ था। इस कैंपेन में 'भाईचारे' के नाम पर अधिकतर हिन्दू लड़कियों को बुलाया गया था। आयोजन में शामिल होने वाले सभी युवक मुस्लिम थे।

लव जिहाद का ‘ईनाम’

2016 में ऐसा प्रकरण सामने आया था जिससे साफ होता था कि हिन्दू लड़कियों को लव जिहाद के जाल में फंसाने पर बाकायदा ‘ईनाम’ के तौर पर पैसा देने की घोषणा की गई था। ‘स्टूडेंट्स आॅफ मुस्लिम यूथ फोरम’ नाम के मुस्लिम संगठन की तरफ से पोस्टर के जरिए व्हाट्सएप समूहों में जारी किये गए सन्देश में हिन्दू, सिख, ईसाई एवं अन्य मतों की लड़कियों को फंसाने के अलग-अलग दाम बताए गए थे। जैसे, लड़की हिन्दू ब्राह्मण है तो 6 लाख, क्षत्रिय है तो 4.5 लाख, सिख है तो 7 लाख और ईसाई के लिए 4 लाख। इस ‘रेट लिस्ट’ के वायरल होने पर पुलिस की छानबीन में पता लगा कि यह सन्देश वडोदरा से जारी किया गया था। उस समय पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि इस सन्देश को सोशल मीडिया पर शेयर ना करें। लव जिहाद के तहत हिन्दू लड़कियों की ‘कीमत’ तय करते हुए सन्देश में लिखा गया था कि ‘लव जिहाद मिशन फॉर यूनिवर्सल एंड ग्लोबल इस्लाम, लव इज नॉट अ क्राइम एंड जेहाद इज अल्लाज वर्क’। इस संदेश को उर्दू भाषा में भी लिखा गया था। इस सन्देश में गुजरात के अलग-अलग शहरों के पते और फोन नंबर भी दिए गए थे। ये फोन नम्बर और पते लव जिहाद में सफल हो जाने के बाद ‘ईनाम’ की रकम प्राप्त करने के लिए दिए गए थे।

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