ये झठभर का कोई अस्तित्व नहीं है ये लोग बियार, बिंद भरुआ कहार राजहर है इनलोगों ने राजहर को देख के एक नई टाइटल बनाया राजभर अब हर से भर टाइटल में लगा लिया उसके बाद राजभर जाति घोषित किया फिर पासी समाज के उपजाति भारशिव नागवंशी पासी से बने भरपासी, त्रिशूलीय,राजवंशी,अर्कवंशी, कमानी, व्याधा,गुज्जर, रावत कैथवास ,खटीक ,रावत इत्यादि इसी में भरपासी जाति है उसके साथ भरुआ कहार ने अपने आप को जोड़ दिया, देखो चालाकी फिर पासी को ही नकली और खुद को असली बताने लगा 🤣
वैसे राजपूत का संक्षिप्त ऐतिहासिक उत्पत्ति पे राय क्या है!
महाराजा सुहेलदेव पासी, महाराजा लाखन पासी, महाराजा सातन पासी, महाराजा बिजली पासी, राजपासी राजा कंस, महाराजा त्रिलोकचंद्र पासी, महाराजा चिता पासी, महाराजा गंगावास्क रावत इत्यादि इतने महान महान पासी राजा हुए हैं सभी को अपना बताने लगा है 🤣
साला ये बात भी सोचने वाली है जितने भी पासी राजाओं महाराजाओं का इतिहास अवध का है जहां आज भी पासी बहुल है, अवध में भरुआ कहार पनभरवा का कोई अस्तित्व नहीं है वह रहता है पूर्वांचल के कुछ हिस्से पे और दावा करता है अवध के पासी राजाओं पे 🤣, ऐतिहासिक पन्नों में राजभर नाम के कोई जाति नहीं पाई जाति है ये राजनीतिक और चलाकी से बनाया गया है ये लोग भर भी नहीं है भरपासी पासी समाज में आज भी पाई जाती हैं तो दूसरे जो भरुआ कहार राजहर से राजभर और अब भर पे दावा ठोक दिया है लेकिन इनलोगों के पास 1800 के समय के एक भी एतिहासिक पन्नो में उल्लेख नहीं मिलेगा कि ये लोग भरपासी थे!
वैश राजपूत की उत्पत्ति भी गजब रोचक है नागवंशी भारशिव पासी से मिलता है ये भी आश्चर्य बाली बात है! महाराजा त्रिलोकचंद्र पासी ने दिल्ली पे राज किया था उसके बेटे ने क्षत्रिय 21 रानियों से विवाह कर लिया था उसी से त्रिलोकचंद्र पासी ने अपने बेटे अभय पासी (सिंह) को नहीं अपनाया था उसी को आज वैश्य राजपूत कहते हैं! पासी राजाओं का युद्ध भी सबसे ज्यादा मुस्लिम आक्रांताओं से ही हुआ है, पासी समाज ने अंग्रेजों और मुस्लिमो से निरन्तर लड़ते रहा, उसके कारण मुख्य धारा से अलग जंगल में जीने पे मजबूर हो गए, कितने अंग्रेजों को चोरी छुपे मार देने के कारण क्रिमिनल ट्राइव एक्ट लगा के पासी को शक्ति से कुचलने की बात कही गई वह आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है!


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