मोहन भागवत जी का बयान एकता पर जोर देता है—SC/ST समुदायों को हिंदू समाज का अभिन्न अंग मानते हुए रोटी-बेटी के रिश्तों की बात की गई है।
ये हिंदू समाज को मजबूत करने का प्रयास लगता है, जो RSS की लंबे समय से चली आ रही 'हिंदू एकता' की विचारधारा से मेल खाता है।आपके सवालों का सारआपका मुद्दा वैध है: अगर SC/ST के कुछ सदस्य मंदिर तोड़ने, देवी-देवताओं का अपमान करने या मनुस्मृति जलाने जैसे कृत्यों में लिप्त हैं, तो क्या उन्हें हिंदू माना जाए? मोहन जी की चुप्पी क्यों? ये सवाल आस्था की रक्षा और समान मर्यादा पर केंद्रित हैं।संतुलित नजरियाRSS का स्टैंड: RSS ने हमेशा कहा है कि हिंदू होना सांस्कृतिक पहचान है, न कि सिर्फ जन्म। भागवत जी ने 2018 में भी SC/ST आरक्षण का समर्थन किया था, लेकिन हिंसा या आस्था-विरोधी कृत्यों की निंदा भी की है। उदाहरण: 2020 में उन्होंने कहा कि "हिंदुत्व में हिंसा का कोई स्थान नहीं।" चुप्पी शायद इसलिए, क्योंकि RSS सामाजिक एकीकरण पर फोकस करता है, न कि व्यक्तिगत घटनाओं पर हमला बोलने पर।हिंदू धर्म की प्रकृति: हिंदू धर्म विविधतापूर्ण है—कोई केंद्रीय 'चर्च' नहीं। मनुस्मृति जलाना या मूर्ति-विरोध कुछ दलित कार्यकर्ताओं का प्रतीकात्मक विरोध है (जैसे अंबेडकरवादी), लेकिन सभी SC/ST ऐसा नहीं करते। इसे पूरे समुदाय पर थोपना भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। फिर भी, आस्था का अपमान (जैसे सार्वजनिक गालियां) किसी भी हिंदू द्वारा अस्वीकार्य होना चाहिए—चाहे कोई जाति हो।समान नियम की मांग: बिल्कुल सही। कानून सब पर समान लागू होना चाहिए। ऐसे मामलों में FIR, कोर्ट ही समाधान है, न कि बहिष्कार। उदाहरण: हाल के वर्षों में मंदिर-तोड़ने वाले मामलों (जैसे तमिलनाडु या केरल में) पर RSS ने विरोध प्रदर्शन किए, लेकिन जाति के आधार पर नहीं जोड़ा।मेरी रायभागवत जी की प्रतिक्रिया एकता बढ़ाने वाली है, लेकिन आपके जैसे सवाल उठना जरूरी है ताकि आस्था की रक्षा भी सुनिश्चित हो। अगर सब हिंदू हैं, तो मर्यादा सबकी साझा जिम्मेदारी। चुप्पी टूटे तो बेहतर—RSS को स्पष्ट बयान देना चाहिए कि हिंसा या अपमान बर्दाश्त नहीं। ये विवाद समाज को कमजोर करता है, एकता मजबूत।क्या आप किसी खास घटना (जैसे मनुस्मृति जलाने वाली) का उदाहरण देकर और चर्चा करना चाहेंगे?
हमारे धर्म सर्वोपरि हैं इसलिए धर्म के रक्षकों के साथ भेद भाव नहीं उनके साथ उठाना बैठना, खाना पीना चालू करना चाहिए, अच्छे कर्म करना चाहिए, एक मानवता के अच्छे कर्म सेवा और धर्म की रक्षा करना है! आप जिससे नफरत कर रहे हो वहीं कल को हमारे लिए अपने समस्त हिन्दू समाज के लिए युद्ध लड़ेगा इसलिए अपने बेटी दो और उनके बेटी लो, इससे उच्च नीच भेद भाव खत्म होगी जिससे असुरी शक्ति खुद ही खत्म हो जाएगा! समानता जिस दिन कायम कर दो उसी दिन हिन्दु समाज प्रगति और सुरक्षित रहेगा!



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