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ऋषि कश्यप के नाग पत्नी कुदरू के 101 पुत्रों का पूरा देश पे शासन रहा है! नागवंश के आज भी क्षत्रिय ब्राह्मण समाज के लोग हैं भारशिव नागवंशी पासी क्षत्रिय का साम्राज्य उत्तर भारत पे रहा है! आगे पढ़े!

 नाग वंश: प्राचीन भारत के शक्तिशाली शासक जिनकी छाप आज भी बिखरी हैभारतीय इतिहास के गर्भ में छिपे नाग वंश ने एक समय पूरे उपमहाद्वीप पर राज किया। पुराणों और शिलालेखों से पता चलता है कि ये नागा समुदाय न केवल भारत (पाकिस्तान-बांग्लादेश सहित) के स्वामी थे, बल्कि विदेशों तक अपनी विजय ध्वजा फहराई। आइए जानें इस गौरवशाली वंश की कहानी।नागों की व्यापक उपस्थितिक्षेत्रीय शासन: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नल-नाग वंश और कवर्धा के फणि-नाग वंश का उल्लेख मिलता है। मध्यप्रदेश के विदिशा पर शेष, भोगिन, सदाचंद्र, धनधर्मा, भूतनंदि, शिशुनंदि (या यशनंदि) जैसे नाग राजाओं ने राज्य किया।'नागा आदिवासी' का संबंध: नागा आदिवासी भी इन्हीं नागों से जुड़े माने जाते हैं, जो ब्राह्मण, क्षत्रिय समेत सभी वर्गों को समाहित करते थे।प्रमुख राजवंश: तक्षक, तनक और तुश्त नागों की लंबी परंपरा रही, जिनकी विजयें भारत से परे फैलीं।शहर-गांवों में अमिट निशाननागवंशियों ने भारत के कोने-कोने पर राज किया, इसलिए 'नाग' शब्द आज भी सैकड़ों स्थानों में जीवित है:नागपुर का उद्गम: महाराष्ट्र का नागपुर नागवंशियों ने बसाया। वहां की नाग नदी और पास का प्राचीन नागरधन नगर इसका प्रमाण हैं। कई महार जातियां भी इसी वंश से जुड़ीं।नागदाह के गांव: हिंदी पट्टी में 'नागदाह' नामक कई स्थान नाग किंवदंतियों से भरे हैं।नागालैंड का रहस्य: नगा या नागालैंड को नागवंशियों की भूमि क्यों न माना जाए? इसकी जड़ें प्राचीन नाग सभ्यता से जुड़ती प्रतीत होती हैं।निष्कर्ष: नाग वंश की यह विरासत साबित करती है कि प्राचीन भारत की शक्ति एकीकृत और विस्तृत थी। पुराणों की ये कथाएं हमें हमारी गौरवपूर्ण जड़ों से जोड़ती हैं। क्या आप किसी विशिष्ट नाग राजा या क्षेत्र पर और जानना चाहेंगे?स्रोत: पुराण, शिलालेख और क्षेत्रीय इतिहास। अधिक शोध के लिए प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करें।


उत्तर भारत के अवध क्षेत्र में भारशिव नागवंशी पासीयो का सम्राज्य था, नाग बाली परम्परा उनलोगों में आज भी जीवित है! नागवंशी पासीयो के आज भी अवध क्षेत्र में उनके राजा महाराजाओं का किला देखने को मिलता है! महाराजा लाखन पासी ने लखनऊ शहर बसाया था, महाराजा लाखन पासी का युद्ध मुस्लिम आक्रांता सैयद सालार गाजी के सेनापति सैयद हातिम और सैयद खातिम से हुआ था, राजपासी राजा कंस ने देखा कि महाराजा लाखन पासी युद्ध में घिर चुके हैं तो उन्होंने उनकी मदत की थी, और राजपासी राजा कंस ने सैयद हातिम और सैयद खातीम को जिन्दा तेल में जलाकर मारा था!

जब सैयद सालार गाजी के है आधे से ज्यादा सेना को गाजर मूली के तरह काट दिया गया था तब सैयद सालार गाजी ने फिर से तुर्क सेना मंगवाकर श्रावस्ती पे हमला किया फिर घनघोर युद्ध पासी सेना और तुर्क सेना के बीच में हुआ, पासी सेना में त्रिशूलिया कमानी व्याधा गुज्जर रावत कैथवास खटीक अरख, भरपासी,राजपासी राजवंशी इत्यादि का अपना अपना युद्ध लड़ने में महारत हासिल था, जब पासी सेना तुर्क के सेनाओं को गाजर मूली के तरह काट्टटा गया फिर महाराजा सुहेलदेव पासी और सैयद सालार गाजी के बीच युद्ध हुआ और सैयद सालार गाजी मारा गया, ऐसे ऐसे इतिहास को जाति पाती भेद भाव से ग्रसित मानसिकता बाले इतिहासकार ने पूरे भारत वर्ष से छिपा रखा था या वामपंथी इतिहासकार को ज्ञान की कमी थी वह पूरी तरह सही ढंग से शोध नहीं किया होगा! 

आल्हा और ऊदल को हराकर मारने वाले महाराजा सातन पासी थे, दिल्ली शहर पे 7 पुश्तों तक राज करने वाला महाराजा त्रिलोकचंद्र पासी थे!

भारत के अन्य क्षेत्रों में नाग वंश के अवशेष पुराणों, शिलालेखों और सिक्कों से प्रमाणित हैं। ये 2nd-4th शताब्दी ई. के प्रमुख थे, जिन्हें गुप्तों ने हराया।उत्तरी भारतमथुरा-विदिशा से आगे: पद्मावती (ग्वालियर), नरवर (राजधानी?), भरतपुर, उज्जैन तक विस्तार। नव नाग (भारशिव) ने शासन किया।राजस्थान: मंडोर (नागा नदी), नागौर (तक्षक शाखा), जोधपुर (भोगी पहाड़), पुष्कर (नाग पहाड़)। जाट नाग गोत्र।उत्तर प्रदेश: श्रुधन (अंबाला), इंदौरपुर (बुलंदशहर), चम्मा। पासी तक्षक नाग से जुड़े।कश्मीर: अनंतनाग (अनंत नाग), कर्कोटक शाखा (ललितादित्य काल)। राजतरंगिणी में उल्लेख।छोटा नागपुर (झारखंड): पालकोट, ऋतुराज्य, पंचकोट, कालाहांडी। नागवंशी क्षत्रिय आज भी बसे।पूर्वोत्तर और पूर्वअसम, नागालैंड, मणिपुर: नागा जातियां, सर्प पूजा। प्राचीन नाग प्रभाव।बिहार: रांची, हजारीबाग, मुजफ्फरपुर में वंशज।दक्षिण भारतकेरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु: नागा वर्चस्व, नाग पूजा स्थल। नागपंचमी पर प्रमाण।ओडिशा: कालाहांडी क्षेत्र।


विदिशा के भारशिव नागमध्यप्रदेश के विदिशा (प्राचीन बेसनगर) पर 1वीं-3वीं शताब्दी ई. में भारशिव (नव नाग) वंश ने शासन किया। वंशावली इस प्रकार है: शेषनाग, भोगिन, रामचंद्र, धर्मवर्मा, वंगर, भूतनंदी, शिशुनंदी, यशनंदी, पुरुषदत्त, कामदत्त, भावदत्त, शिवनंदी। ये लगभग 200 वर्ष शासक रहे, जिनके सिक्के और शिलालेख मिले हैं। छत्तीसगढ़ के नाग वंशबस्तर का छिंदक नाग: 10वीं सदी से 1313 ई. तक, संस्थापक नृपति भूषण। राजधानी भोगवतीपुरी। प्रमुख राजा: सोमेश्वरदेव (1096-1111 ई., कलचुरी से युद्ध), जयसिंहदेव, नरसिंहदेव। मामा-भांजा मंदिर, बत्तीसा मंदिर जैसे निर्माण। नरबलि प्रथा का प्रमाण मिला।कवर्धा का फणि-नाग: 10वीं-14वीं सदी, कलचुरी अधीन। संस्थापक अहिराज (अहि-मिथिला वंश)। प्रमुख: गोपालदेव (भोरमदेव मंदिर 1089 ई.), रामचंद्रदेव (मड़वा महल), मोहनदेव (अंतिम)।

ये वंश ब्राह्मण-क्षत्रिय समुदायों से जुड़े, नाग चिह्न वाले। जनमेजय के नागयज्ञ से कई केंद्र नष्ट हुए।नागपुर और नामकरणनागपुर (महाराष्ट्र) की स्थापना 1702 ई. में गोंड राजा बख्त बुलंद शाह ने की, नेवरा गांव से। नाग नदी प्राकृतिक, लेकिन नागरधन प्राचीन नाग स्थल। महार जाति नाग वंश से जुड़ी मानी जाती है। 'नागदाह' गांव किंवदंतियों से युक्त।नागालैंड संबंधनागालैंड के नागा जनजातियां (16 प्रमुख) तिब्बत-बर्मी मूल की, 12वीं-13वीं सदी से असम (अहोम) संपर्क। ब्रिटिश काल (1828+) में अलगाववादी। प्राचीन नाग वंश (सर्प पूजक क्षत्रिय) से भाषाई/नाम समानता संभव, लेकिन प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं—ये पूर्वोत्तर आदिवासी।

नागवंश की सिक्कों और पुरातात्विक अवशेष भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जो 2nd-4th शताब्दी ई. के उनके शासन को प्रमाणित करते हैं।सिक्कों की विशेषताएंनागवंश के सिक्के मुख्यतः तांबे के छोटे आकार के होते थे, जिन पर नाग (सर्प) चिह्न प्रमुख था—फण फैलाए सर्प, ताड़ वृक्ष, त्रिशूल, शिवलिंग या गंगा मूर्ति अंकित। ये हिंदू पुनरुत्थान के प्रतीक माने जाते हैं। भारशिव नाग के राजा वीरेनद्र (या गणपति) के सिक्के मथुरा, कौशाम्बी, पद्मावती (पवाया, ग्वालियर), अहिच्छत्र (उत्तर प्रदेश), पंजाब और विदिशा से मिले। टकसालें: कौशाम्बी, पद्मावती, मथुरा।प्रमुख पुरातात्विक स्थलपवाया (पद्मावती, मध्य प्रदेश): बौद्ध स्तूप, विहार, नाग चिह्न सिक्के; नागवंशी बौद्ध शासकों का प्रमाण।विदिशा-बेसनगर: शिलालेख, सिक्के (शेषनाग से यशनंदी तक वंशावली)।अजंता गुफा 16: भारशिव नाग शासक गणपति का शिलालेख।छोटा नागपुर (झारखंड): नवरत्न गढ़ में भूमिगत महल, 16वीं-17वीं सदी के नागवंशी अवशेष।अन्य: नागौर (राजस्थान), अनंतनाग (कश्मीर) में मूर्तियां, नाग कुंड।तुलनात्मक विवरण

सिक्के : नाग, त्रिशूल, गंगा देवी-कौशाम्बी पद्मावती पासी जाति में त्रिसुलिया पासी से सब कुछ मिलता है जो तार के पेड़ से जुड़े है!

शिलालेख 

वंशावली: (भोगिन, भूतनंदी, भारशिव पासी) -विदिशा, अजंता

संरचनाएं : स्तूप, मंदिर, महल -पवाया, नवरत्न गढ़


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